प्रयागराज न्यूज : गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच संगमनगरी प्रयागराज में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कानपुर गंगा बैराज से करीब 2.95 लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़े जाने के बाद प्रयागराज में नदी के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार बैराज के सभी 30 गेट खोले गए हैं और करीब 2,95,637 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है।
लगातार बढ़ रहा गंगा-यमुना का जलस्तर
प्रयागराज में पहले से ही गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक फाफामऊ, छतनाग और नैनी में जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे थीं, लेकिन लगातार बढ़ता पानी और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाली अतिरिक्त जलराशि चिंता बढ़ा रही है।
संगम क्षेत्र में बढ़ा पानी
बढ़ते जलस्तर का असर संगम क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों में संगम क्षेत्र में जलभराव बढ़ने और बड़े हनुमान मंदिर तक पानी पहुंचने की स्थिति का उल्लेख किया गया है। नदी किनारे रहने वाले तीर्थपुरोहितों और दुकानदारों ने भी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू किया है।
निचले इलाकों में प्रशासन अलर्ट
भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रयागराज के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और नगर निगम की टीमें जल निकासी और राहत कार्यों पर नजर रख रही हैं। नगर निगम ने त्वरित कार्रवाई दल (QRT) का गठन भी किया है।
वहीं, लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ रहा है ?
प्रयागराज में इस समय खतरा केवल कानपुर बैराज से छोड़े गए पानी की वजह से नहीं है। भारी मानसूनी बारिश के कारण गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों में भी पानी बढ़ रहा है। टोंस और बेलन नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर भी चेतावनी सामने आई है।
ऐसे में आने वाले समय में गंगा-यमुना के जलस्तर में और वृद्धि होती है या नहीं, इस पर प्रशासन और केंद्रीय जल आयोग की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

